फरीदाबाद, राकेश देव। विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, क्षेत्रीय संगठनों, एवं किसान मोर्चा के 29 जुलाई 2026 को दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में संपन्न हुए राष्ट्रीय सम्मेलन के आह्वान पर जॉइंट ट्रेड यूनियन काउंसिल फरीदाबाद 10 अगस्त को जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी। यह निर्णय आज एचएमएस के कार्यालय में कामरेड विशम्बर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई बैठक में लिया गया। इस बैठक में इंटक के कामरेड हुकमचंद बैनिवाल एटक के आर एन सिंह,एच एम एस के राजपाल डांगी, तृप्ति शर्मा, सीटू के कामरेड निरंतर पराशर, सर्व कर्मचारी संघ के करतार सिंह जागलान आई सी टी यू के कामरेड जवाहरलाल ने भाग लिया। कार्रवाई का संचालन करते हुए कन्वीनर वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि लगातार संघर्षों के बावजूद भी केंद्र की सरकार ने चार श्रम संहिताओं को लागू करने का आदेश जारी कर दिया। इसका उद्देश्य यूनियनों को कमजोर और पंगु बनाना है। जिससे ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण और मान्यताएं कठिन हो जाएगी। जबकि कारखाने के मालिकों द्वारा नियमों का उल्लंघन वैध माना जाएगा। श्रम संहिताओं के अनुसार यूनियनें और उनका नेतृत्व प्रभाव हीन हो जायेगा। जबकि नियोक्ताओं के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी। कार्यस्थल, निरीक्षण को सुविधादाताओं के नाम पर समाप्त कर दिया गया है। और निरीक्षण के लिए ऑनलाइन निरीक्षण चयन का सहारा लिया जा रहा है। हड़ताल का अधिकार व्यावहारिक रूप से असंभव बना दिया गया है। काम के घंटों में वृद्धि और निश्चित अवधि के रोजगार को सामान्य बनाया गया है। इन सहिताओं के तहत अधिकांश श्रमिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। कारखाना अधिनियम और औद्योगिक स्थाई आदेशों में सीमा में वृद्धि के कारण 70% से अधिक कारखाने और संगठित क्षेत्र के 90% श्रमिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं। सामूहिक सौदेबाजी और त्रिपक्षीय वार्ता को लगभग समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ-साथ किसानों के ऐतिहासिक और लंबे धरने के बाद जिसमें 700 से अधिक किसानों ने अपनी जान गंवाई, तीन कृषि कानूनों को निरस्त करते समय किसानों से किए गए 11 वादे अभी तक पूरे नहीं किए हैं। किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य की, मांग अभी तक लागू नहीं हुई है। केंद्र सरकार अमेरिका, यूरोपीय संघ और कुछ अन्य देशों के साथ व्यापार समझौता कर रही है। जो हमारे कृषि क्षेत्र और लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए हानिकारक है। निश्चित रूप से यह हमारे देश के किसानों,छोटे व्यवसायियों व्यापारियों, और लघु और मध्यम उद्योगों के लिए हानिकारक है। यह समझौता हमारे देश के किसानों द्वारा तैयार किये गये बीज और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा स्वदेशी कृषि विकास के लिए किए गए वैज्ञानिक शोधों को कमजोर और खतरे में डाल रही है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के विभागों जैसे रेलवे, बंदरगाह डाक, तार, कोयला, खदानों ,तेल गैस, इस्पात ,तांबा, रक्षा, सड़क परिवहन, हवाई अड्डे,बैंक बीमा, परमाणु ऊर्जा, बिजली उत्पादन, और आपूर्ति आदि के निजीकरण विनिवेश और बिक्री को जारी रखे हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 को बढ़ावा दे रही है।जो हमारे देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। कृषि श्रमिक संघ और ग्रामीण श्रमिक वर्ग वी बी- ग्राम- जी को लागू करने के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। शहरी बेरोजगारों के लिए रोजगार गारंटी योजना की मांग अभी भी लंबित है। नई शिक्षा नीति का छात्रों और शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। पिछले 10 वर्षों में 152 प्रश्न पत्र लीक हो चुके हैं। प्रश्न पत्रों के लीक होने से छात्रों युवाओं और उनके माता-पिता एक समान रूप से परेशान हैं।। बेरोजगारी बढ़ रही है।



