फरीदाबाद, राकेश देव। हरियाणा महिला कांग्रेस की सचिव हेमलता शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री जी विपक्षी दलों से उन विधेयकों के समर्थन अपील कर रहे है जो केंद्र सरकार संसद के एक विशेष सत्र में उस समय ला कर थोपना चाहती है जब तमिलनाडु और पच्छिम बंगाल का चुनावी अभियान जोर शोरों पर है। इतनी जल्दबाज़ी क्यों जबकि मानसून सत्र आने वाला है। इसके बादवजूद भाजपा सरकार द्वारा विशेष सत्र बुलाना पूरी तरह अनावश्यक प्रतीत होता है। यह बातें आज हरियाणा महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव हेमलता शर्मा ने एक वक्तव्य जारी करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया नया नहीं है। चुनावों के बीच इस प्रकार सत्र बुलाना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इसकी ऐसे विषयों पर मानसून में विस्तार से चर्चा की जा सकती थी। महिला आरक्षण बिल में कोटा के भीतर कोटा लागू करों। हर वर्ग की महिला को उसकी जनसँख्या के अनुपात में वाजिब हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ही नहीं अपितु पूरा देश महिला आरक्षण का समर्थन करता है। साल 2023 में सर्वसम्मति से ये बिल पारित हुआ और अब हमारे संविधान का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी ने पंचायतें और स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण एक तिहाई की नीव रखी थी। सन 1993 में महिलाएँ जन प्रतिनिधि के तौर पर चुन कर आने लगी और जिसका परिणाम ये है की 15 लाख से अधिक पंच, सरपंच प्रधान पार्षद मेयर है। जो कांग्रेस और संविधान की की वजह से है। फिर नारा उठा आधी आबादी पूरा हक़। ये हक़ पूरा नहीं था अभी मुझे स्थानीय निकायों और नगर निगम में हक़ मिला है अभी विधानसभा और लोकसभा में अपना हक़ लेना है। सन 1996 में 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा हुई और जिसका विरोध भाजपा अन्य दलों ने किया और बिल पास नहीं हो पाया लेकिन जब यूपीए सरकार आयी तो सोनिया गाँधी और कांग्रेस का वादा था की हम महिला आरक्षण को लागू करेंगे। यूपीए की सरकार नहीं थी राज्यसभा में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत थी राज्यसभा में कांग्रेस का पूर्ण बहुमत था इसलिए बिल पास हो गया और लोकसभा में बहुमत नहीं होने के कारण बिल पारित नहीं हो सका। कांग्रेस लोकतंत्र में विशवास लोकडाउन लगाना हो या विदेश निति हो।
भाजपा महिला आरक्षण की आड़ में खेल रही अपना खेल: हेमलता शर्मा


