जब यमुना जी हथिनी कुण्ड से वृन्दावन तक अपभ्रंशित हैं फिर कैसे होगा सनातन को जोड़ने का काम – डॉ.आर एन सिंह
सामूहिक स्नान-ध्यान तथा सनातन को संगठित करने वाले धार्मिक व अध्यात्मिक अनुष्ठान नगण्य होने लगे हैं, ऐसे में स्थायी सनातन एकता भला कैसे संभव है? – डॉ. आर एन सिंह
फरीदाबाद, राकेश देव। यमुनाजी की अविरलता तथा निर्मलता पर चर्चा के लिए श्री यमुना जल जन जागरण अभियान के तहत यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आर एन सिंह फरीदाबाद-दिल्ली सीमा पर स्थित जोर खोड़ मंदिर पहूँचे जहाँ से हाल ही में श्री बागेश्वर धाम सरकार के अधिष्ठाता पं. धीरेन्द्र शास्त्री दिल्ली से वृन्दावन तक सनातन जोड़ो यात्रा का शुभारंभ किए थे। जोर खोड़ मंदिर के पीठाधीश्वर बाबा रामदास जी महाराज को डॉ. आर एन सिंह ने राधे-राधे का शाल से सम्मानित कर हथिनी से लाया पवित्र जल भेंट किए। चर्चा के क्रम में डॉ.आर एन सिंह ने कहा कि हथिनी कुण्ड के आगे ब्रजक्षेत्र तक प्राकृतिक मार्ग में पवित्र यमुना जल नही है ऐसे में सामूहिक स्नान-ध्यान तथा सनातन को संगठित करने वाले धार्मिक व अध्यात्मिक अनुष्ठान नगण्य होने लगे हैं, ऐसे में स्थायी सनातन एकता भला कैसे संभव है? डॉ. आर एन सिंह ने कहा कि हथिनी कुण्ड के आगे प्राकृतिक मार्ग में पवित्र यमुना जल का नहीं होना न सिर्फ धार्मिक रूप से गलत है अपितु मानवाधिकार तथा प्राकृतिक न्याय का घोर हनन भी है। केंद्रीय तथा राज्य सरकारें यमुना जी की अविरलता तथा निर्मलता के प्रति संवेदनहीन हैं। ब्रजक्षेत्र सहित दिल्ली, फरीदाबाद तथा पलवल के साथ हो रहा घोर अन्याय असहनीय हो चुका है, ऐसे में यमुना रक्षक दल के पास जन जागरण के माध्यम से व्यापक जन आन्दोलन का मार्ग ही विकल्प के रूप में बचा है। जोर खोड़ मंदिर के पीठाधीश्वर बाबा रामदास जी महाराज ने कहा कि सरकार को यमुनाजी की अविरलता तथा निर्मलता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए, आवश्यक ठोस कदम उठाकर सनातन की सूत्रधार यमुना जी की अविरलता तथा निर्मलता सुनिश्चित करनी चाहिए। जब तक यमुना की अविरलता तथा निर्मलता सुनिश्चित नही हो जाती धार्मिक तथा सामाजिक संगठनों को उचित पटल पर आवाज उठाते रहनी चाहिए।



