फरीदाबाद, राकेश देव। मानेसर मजदूर आंदोलन में गिरफ्तार श्रमिकों को रिहा करने, न्यूनतम वेतन लागू करने, डबल ओवर टाइम और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी प्रदान करने सहित अन्य मांगों को लेकर आज सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू जिला कमेटी के सैकड़ो वर्करों ने लघु सचिवालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभी कारखानों के श्रमिक और विभिन्न परियोजनाओं के सैकड़ो वर्कर सवेरे राजस्थान भवन के सामने एकत्रित हुए। यहां पर विरोध सभा आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता जिला प्रधान निरंतर पाराशर और संचालन जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि राज्य सरकार की न्यूनतम वेतन को लागू करने में ढुलमुल नीति अपनाने के कारण श्रमिकों में नाराजगी बढ़ी। प्रदर्शन कारियों को सीटू के महासचिव जय भगवान ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में 2 मार्च को न्यूनतम वेतन 15220 रुपए करने का ऐलान किया था। लेकिन समय रहते इसका नोटिफिकेशन नहीं किया गया। एक तरफ श्रमिकों को बढ़ती हुई महंगाई के कारण रसोई गैस मिलनी बंद हो गई। दूसरी तरफ मकान मालिकों ने किराया बढ़ाना शुरू कर दिया। जबकि न्यूनतम वेतन में सरकार ने कोई इजाफा नहीं किया। सरकार की टालमटोल की नीति और बढ़ती हुई महंगाई की वजह से परेशान होकर मानेसर के विभिन्न कारखानों के श्रमिकों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन में सरकार ने पुलिस बल का प्रयोग करके गरीब श्रमिकों को जेल में बंद कर रखा है। उनकी नाजायज गिरफ्तारी की गई है। इस प्रदर्शन के माध्यम से सीटू हरियाणा राज्य सरकार से निर्दोष श्रमिकों को रिहा करने की मांग करता है। क्योंकि इसके लिए श्रमिक दोषी नहीं है। यदि सरकार समय पर वेतन बढ़ोतरी कर देती तो ऐसे हालात पैदा नहीं होते। अपने आप को मजदूरों, गरीबों का हितेषी बताने वाली भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार मजदूरों के दामन पर उतर आई है । हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं। जहां लाखों की संख्या में मजदूर हैं। देश के सभी हिस्सों से आकर यहां पर काम करते हैं नियम से एनसीआर का वेतन एक होना चाहिए। दिल्ली में न्यूनतम वेतन 18000 रुपए है। जबकि हरियाणा में यह मार्च तक केवल 11274 था। नियम अनुसार हरियाणा में 2020 में वेतन रिवाइज होना चाहिए था। जो भाजपा ने नहीं किया ।सीटू और अन्य ट्रेड यूनियनों द्वारा किए गए आंदोलन के चलते पिछले साल 2025 के मई महीने में न्यूनतम वेतन की सिफारिश करने के लिए कमेटी बनाएगी गई जिसमें मजदूरों , मालिकों और सरकार के प्रतिनिधि थे। इस कमेटी की 9 बैठक हुई। उन बैठकों में 30000 रुपए न्यूनतम वेतन की मांग की। लेकिन कमेटी ने 29 दिसंबर 2025 की पानीपत बैठक में 23196 का सर्वसम्मत से प्रस्ताव पारित किया। परंतु इसे स्वीकार करने के बजाय मुख्यमंत्री ने जल्दी बाजी में न्यूनतम वेतन की घोषणा कर दी। सीटू ने सरकार व प्रशासन द्वारा आंदोलन स्थल पर धारा 163 लगाकर मजदूरों का भयंकर दमन करने की कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि मानेसर में 20 महिलाओं सहित 55 मजदूरों को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अभी भी मजदूरों की धर पकड़ जारी है। जबकि अभी भी बड़े हुए वेतन को लागू करने में बहुत से कंपनी के मालिक मना कर रहे हैं। ओवर टाइम डबल नहीं देना चाहते। मकान किराए महंगे होने के चलते रसोई गैस की कीमत बढ़ने के कारण श्रमिको को बदहाली का जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया गया है। उनके लिए उचित आवास की व्यवस्था नहीं है। कंपनी की कैंटीन में कच्चे श्रमिकों को खाना नहीं मिलता है। त्योहारों पर छुट्टियां नहीं मिलती हैं। बोनस नहीं दिया जाता है। कंपनी परिसर में शौचालय नहीं है। राज्य कमेटी ने सरकार से न्यूनतम वेतन 23196 रुपए प्रतिमाह देने, गिरफ्तार मजदूरों को बिना शर्त रिहा करने। श्रमिकों के खिलाफ दर्ज की गई एफ आई आर रद्द करने। ठेका प्रथा समाप्त करने, सभी ठेका श्रमिकों को कंपनी के रोल पर लेने, मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेने ,पुराने कानूनों की पालना करने, सभी उद्योगों में सुरक्षा मानकों की व्यवस्था करने की मांग को लेकर 13 अप्रैल को प्रदेश के मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री को ज्ञापन दे दिया था। आज के प्रदर्शन को सीटू के जिला कमेटी सदस्य विजय झा, रिटायर कर्मचारी संघ के जिला प्रधान नवल सिंह, ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के उप महासचिव देवी राम, आशा वर्कर यूनियन की जिला प्रधान हेमलता आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर भारत गियर लिमिटेड के प्रधान रवि, सचिव मनोज , कोषाध्यक्ष प्रेम, स्टार वायर के संतराम, ओ एम पी के प्रधान अरविंद, कोषाध्यक्ष टेकचंद, ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला सचिव राजू, मिड डे मील की जिला सचिव गीता आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।



