लेबर कोड्स का विरोध
अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी परिसंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील खटाना ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड्स को मजदूर वर्ग पर बड़ा हमला बताया है। फरीदाबाद कार्यालय में हुई एचएसईबी वर्कर्स एसोसिएशन 292 की बैठक में उन्होंने कहा कि ये कोड पूंजीपतियों और कॉरपोरेट सेक्टर को मजदूरों को गुलाम बनाने का रास्ता साफ करते हैं और 100 साल में हासिल अधिकारों को पलटते हैं।
मुख्य आपत्तियां
- फिक्स टर्म नौकरी का अर्थ है पक्की नौकरी का खात्मा।
- 20 मजदूरों तक के संस्थानों को श्रम कानूनों से बाहर रखा गया है।
- 300 मजदूरों तक के संस्थानों को बिना सरकार की अनुमति के बंद किया जा सकता है।
- काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 करने का प्रावधान है।
- यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार पर अघोषित प्रतिबंध है।
- श्रम न्यायालयों को खत्म किया गया है और वेरिफिकेशन का अधिकार लेबर विभाग से छीना गया है।
आंदोलन की चेतावनी
सुनील खटाना ने कहा कि मजदूर और कर्मचारी आंदोलन इस हमले का माकूल जवाब देगा और इसे वापस करवाने के लिए निर्णायक आंदोलन करेगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने 29 श्रम कानूनों को खत्म करके 2020 में चार लेबर कोड्स पारित किए थे, जिनका मजदूर संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं।



