एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (ए.एम.आर) पर सम्मेलन
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद में ए.एम.आर नैक्स्ट 2025 सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सुरक्षित भविष्य के लिए एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से निपटने की रणनीतियों पर विचार करना है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में ग्लोबल हेल्थ लीडर्स, नीतिनिर्माताओं, वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स ने भाग लिया।
सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मनुष्यों, जीव-जंतुओं और पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए भारत में नीति निर्माण, निगरानी और इनोवेशन में तेजी लाना है। भारत बैक्टीरियल संक्रमण के उच्च भार वाले देशों में से एक है, जहाँ ई.कोली, क्लेबसियेला निमोनिए, स्टेफीलोकोकस ऑरियस और एसिनेटोबैक्टर बॉमानी जैसे रोगजनकों में प्रतिरोध देखा गया है।
विशेषज्ञों की राय और चिंताएं
विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग, अपर्याप्त डायग्नोस्टिक सुपरविज़न और जल स्रोतों के प्रदूषण जैसे कारकों पर चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि ए.एम.आर के बढ़ने से मरीजों को लंबे समय तक हॉस्पिटल में रहना पड़ेगा और इलाज की लागत भी बढ़ेगी।
समाधान और रणनीतियाँ
सम्मेलन में वन हेल्थ फ्रेमवर्क पर आधारित समाधानों पर चर्चा की गई, जिसमें डायग्नोस्टिक और एंटीमाइक्रोबियल सुपरविज़न में प्रगति, नए थेरेप्यूटिक्स के लिए इनोवेशन, पर्यावरण और कृषि के पहलू से ए.एम.आर, लैबोरेटरी नेटवर्क को मजबूत बनाना, और नीतियों में तालमेल शामिल है।



