फरीदाबाद, राकेश देव ।इंदौर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत और उसके बाद अधिकारियों पर हुई कड़ी कार्रवाई के बाद फरीदाबाद नगर निगम पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। शहर में पानी की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए म्युनिसिपल कारपोरेशन फरीदाबाद के चीफ इंजीनियर ने सभी 46 वार्डों में नियमित पानी टेस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही हर सैंपल की जांच रिपोर्ट का लिखित रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है। ड्रेन और सीवर के पास पानी की लाइनें बनीं चुनौती शहर की कई कॉलोनियों में पानी और सीवर लाइन एक साथ डाली गई हैं। कुछ इलाकों में ड्रेन के ऊपर से पानी की पाइपलाइन गुजरती है। बरसात के दौरान जब ड्रेन ओवरफ्लो होते हैं, तब गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल जाने की आशंका बढ़ जाती है। निगम को हर सप्ताह दूषित पानी को लेकर करीब 10 से 12 शिकायतें प्राप्त होती हैं। हानिकारक तत्वों पर रहेगी खास नजर चीफ इंजीनियर ने निर्देश दिए हैं कि पानी की टेस्टिंग के दौरान यह भी जांचा जाए कि टीडीएस, फ्लोराइड, क्लोराइड, सल्फेट और अन्य हानिकारक तत्व किस मात्रा में मौजूद हैं। यदि तय मानकों से अधिक तत्व पाए जाते हैं तो संबंधित क्षेत्र में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। दो विभाग संभालते हैं पानी की जिम्मेदारी फरीदाबाद में पानी की आपूर्ति दो प्रमुख विभागों के अधीन है। यमुना किनारे लगे रेनीवेल से पानी फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एफएमडीए) द्वारा नगर निगम के बूस्टर तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद नगर निगम इस पानी को डोर-टू-डोर सप्लाई करता है। दूषित पानी की शिकायतें पार्षदों के माध्यम से भी इंजीनियरिंग ब्रांच तक पहुंचती रहती हैं। सबसे अधिक समस्या बल्लभगढ़ और एनआईटी विधानसभा क्षेत्र में सामने आती है। नगर निगम में शामिल गांवों में भी जांच करीब तीन साल पहले शहर में शामिल हुए 24 गांवों में अभी रेनीवेल लाइन नहीं बिछाई गई है। यहां निगम द्वारा लगाए गए ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति होती है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन ट्यूबवेल से भी नियमित रूप से पानी के सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। पहले भी फेल हो चुका है वाटर ऑडिट प्रदेश सरकार द्वारा कराए गए पिछले जल लेखा परीक्षा में फरीदाबाद के सभी सैंपल फेल पाए गए थे। 74 जल स्त्रोतों में टीडीएस, फ्लोराइड, क्लोराइड और सल्फेट्स मानक से अधिक मिले थे। छह स्रोतों में आर्सेनिक और एक स्रोत में यूरेनियम की मौजूदगी भी सामने आई थी। शिकायत मिलते ही चेतावनी और सुधार कई बार सीवरेज लीकेज के कारण पानी गंदा हो जाता है। निगम का दावा है कि शिकायत मिलते ही लीकेज ठीक कराया जाता है। साथ ही कॉलोनियों के व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों को गंदा पानी इस्तेमाल न करने की सूचना दी जाती है। सतही जल आपूर्ति परियोजनाएँ फरीदाबाद की मौजूदा आबादी और औद्योगिक विस्तार के चलते शहर में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में शहर की कुल दैनिक पानी की मांग करीब 550 से 600 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) आंकी जाती है, जबकि वास्तविक जलापूर्ति लगभग 380 से 400 एमएलडी के आसपास ही है। यानी करीब 150 से 200 एमएलडी पानी की कमी बनी हुई है। यह अंतर गर्मियों में और भी बढ़ जाता है, जब पानी की खपत चरम पर होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए शहर मुख्य रूप से यमुना नदी किनारे लगे रेनीवेल्स और ट्यूबवेल्स पर निर्भर है। हालांकि, भूजल स्तर लगातार गिरने और पानी की गुणवत्ता खराब होने से यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं मानी जा रही। इसी वजह से एफएमडीए और नगर निगम मिलकर नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में यमुना से अतिरिक्त पानी लाने के लिए नए रेनीवेल लगाने, पुराने रेनीवेल्स की क्षमता बढ़ाने और इंटर-लिंकिंग पाइपलाइन बिछाने की योजना है। इसके साथ ही सतही जल आपूर्ति परियोजनाएँ को गति देने की तैयारी है, ताकि भूजल पर निर्भरता कम हो। औद्योगिक क्षेत्रों में उपचारित पानी के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने और नई जल उपचार संयंत्र स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, स्मार्ट मीटरिंग, लीकेज डिटेक्शन सिस्टम और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए पानी की बर्बादी रोकने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो आने वाले 5 से 7 वर्षों में फरीदाबाद पानी की कमी और गुणवत्ता दोनों मोर्चों पर बड़ी राहत हासिल कर सकता है।



