गरवी गुरजारी परिसर में सिल्क और मिरर वर्क कर रहा आकर्षित
-गुजरात के शिल्पकारों के सूती पोशाक सामग्री, साड़ी, स्टोल, कुर्ते, घर की सजावट और फोल्डेबल चटाई उत्कृष्ट उत्पाद पर्यटकों को आ रहे पसंद
फरीदाबाद, राकेश देव।39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प महोत्सव-2026 में इस वर्ष भी गुजरात के शिल्पकार अपने पारंपरिक सिल्क और मिरर वर्क शिल्प के साथ विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। महोत्सव के गरवी गुरजारी परिसर में सजे रंग-बिरंगे स्टॉल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। यहां प्रदर्शित सूती पोशाक सामग्री, साडिय़ां, स्टोल, कुर्ते, घर की सजावट की वस्तुएं तथा फोल्डेबल चटाइयां उत्कृष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक कारीगरी का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रही हैं।गुजरात से आए शिल्पकारों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों में महीन कढ़ाई, चमकदार शीशों की जड़ाई और जीवंत रंगों का प्रयोग किया है। सिल्क और मिरर वर्क की यह कला न केवल परंपरा की पहचान है, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है। महोत्सव में आने वाले देश-विदेश के पर्यटक इन उत्पादों को विशेष रुचि से खरीद रहे हैं। गरवी गुरजारी परिसर में उपलब्ध सूती साडिय़ां और कुर्ते आरामदायक होने के साथ-साथ आधुनिक फैशन के अनुरूप भी हैं, जबकि स्टोल और डेकोरेटिव आइटम घर की सजावट में पारंपरिक स्पर्श जोड़ रहे हैं। फोल्डेबल चटाइयां अपनी उपयोगिता और आकर्षक डिजाइनों के कारण विशेष रूप से पसंद की जा रही हैं।इन शिल्पकारों का कहना है कि सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प महोत्सव भारतीय लोक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प का उत्सव है, जहां विविध राज्यों की पारंपरिक कलाएं एक ही मंच पर देखने को मिलती हैं। सूरजकुंड महोत्सव उन्हें अपने हुनर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर देता है। इससे उन्हें सीधे ग्राहकों से जुडऩे और अपनी कला को नई पहचान दिलाने में मदद मिलती है। इसके लिए उन्होंने हरियाणा सरकार और मेला प्रशासन का आभार व्यक्त भी किया।



