-शनिवार को सूरजकुंड मेले में तीन लाख से अधिक दर्शक, उत्सव में बदला पूरा परिसर
-मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सफल आयोजन, व्यवस्थाओं की हुई सराहना
-देश-विदेश के शिल्पकारों की कलाकृतियों ने मोहा मन, आत्मनिर्भर भारत को मिला बल
फरीदाबाद, राकेश देव।39 वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला का आयोजन इस समय अपने भव्य समापन की ओर तेजी से अग्रसर है और जैसे-जैसे अंतिम दिन नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे मेले की रौनक और जन-उत्साह नई ऊंचाइयों को छू रहा है। शनिवार को मेले में दर्शकों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी, जिसने इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की लोकप्रियता और विश्वसनीयता को एक बार फिर सिद्ध कर दिया। दिनभर मेले परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा और दर्शकों की आवाजाही का आंकड़ा तीन लाख के पार पहुंच गया, जो इस बात का प्रमाण है कि सूरजकुंड मेला आज भी जनमानस के दिलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से आए शिल्पकारों द्वारा प्रस्तुत की गई हस्तशिल्प कृतियां, पारम्परिक कलाकृतियां और अनूठे उत्पाद दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहे। मिट्टी, धातु, लकड़ी, कपड़े, बांस और पत्थर से बनी कलाकृतियों में शिल्पकारों की मेहनत, कल्पनाशीलता और सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पर्यटकों ने न केवल इन उत्कृष्ट उत्पादों की खरीदारी कर आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त किया, बल्कि विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को भी नजदीक से देखने और समझने का अवसर प्राप्त किया।मेले की मुख्य चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को और भी रंगीन व जीवंत बना दिया। देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य एवं संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, लोकगीतों की मधुर धुनें और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शक झूम उठे। वहीं, विदेशी कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी अंतरराष्ट्रीय सौहार्द और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सुंदर संदेश दिया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों की गडग़ड़ाहट से स्वागत किया। परिवार सहित मेले में पहुंचे पर्यटकों के लिए यहां मनोरंजन, खरीदारी और स्वाद—तीनों का भरपूर संगम देखने को मिला। मेले में स्थापित फूड कोर्ट में देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू पूरे परिसर में फैली रही। राजस्थान के दाल-बाटी-चूरमा से लेकर दक्षिण भारत के डोसा-इडली, उत्तर भारत के छोले-भटूरे और पूर्वोत्तर भारत के विशेष व्यंजनों तक, हर स्वाद के लिए कुछ न कुछ उपलब्ध रहा। पर्यटकों ने न केवल इन व्यंजनों का आनंद लिया, बल्कि अपने परिवार और मित्रों के साथ बिताए गए इन यादगार पलों को कैमरों में कैद कर स्मृतियों का हिस्सा बनाया। हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत सफल सिद्ध हो रहा है। मेला प्रशासन द्वारा की गई सुदृढ़ और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण भारी भीड़ के बावजूद आवागमन सुचारू रूप से संचालित रहा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था और पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं के चलते दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। मेले में तैनात सुरक्षा कर्मियों, स्वयंसेवकों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भूमिका ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक आगंतुक सुरक्षित और सहज वातावरण में मेले का आनंद उठा सके। स्वच्छता अभियान के अंतर्गत नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे मेला परिसर स्वच्छ और सुव्यवस्थित बना रहा। जैसे-जैसे यह ऐतिहासिक मेला अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे दर्शकों का उत्साह और उमंग और भी बढ़ती नजर आ रही है। लोग न केवल दोबारा मेले में आने की इच्छा जता रहे हैं, बल्कि अपने परिचितों और मित्रों को भी इस सांस्कृतिक महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। रविवार को समापन तक यह मेला एक बार फिर अपनी भव्यता, सांस्कृतिक विविधता और लोकप्रियता की मिसाल कायम करेगा। निस्संदेह, सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला न केवल शिल्पकारों को एक वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भरता और एकता में विविधता के संदेश को भी देश-विदेश तक प्रभावी ढंग से पहुंचा रहा है।


